लाला जी, यानि श्रीमान रामकृष्ण शर्मा, हिंदी के एक रिटायर्ड अध्यापक और अपने परिवार के सबसे बड़े सदस्य, किसी घडी के कांटे से कम नहीं थे | आमतौर पर इन्सान घड़ी के साथ साथ चलता है | लेकिन लाला जी के पीछे - पीछे घड़ी को भागना पड़ता था | समय के एकदम पक्के लाला जी को कामचोरी से सख्त नफरत थी | उनका हर काम समय पर और एकदम सलीके से पूरा होता था | अनुशासन को पानी में घोल कर पी जाने वाले लाला जी के पास अपनी बात मनवाने के लिए भी सौ तरीके थे | अपने बातें मनवाने के लिए लाला जी के पास कही - सुनाई कहानियो का एक पिटारा था | समय - समय पर और ज़रूरत अनुसार लाला जी उस पिटारे में से एक कहानी निकल कर लोगों की और फेंकते और अपनी बातें मनवा लेते |


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